उत्तराखंड के 13 जिलों में 47 फायर स्टेशन हैं। फायर ब्रिगेड में कर्मचारियों की संख्या भी 50 फीसदी कम है।अग्निशमन विभाग के ज्यादातर वाहन 15 साल की मियाद भी पूरी कर चुके हैं। ऐसे में अग्निशमन विभाग संशाधनों और कर्मचारियों के साथ वाहनों की कमी से जूझने को मजबूर है। विभाग के उपनिदेशक संदीप कुमार राणा ने बताया कि उत्तराखंड में 47 फायर स्टेशन हैं और 11 जीर्णशीर्ण स्थिति में हैं। इसके अलावा 9 यूनिट ऐसे हैं, जो किराए की बिल्डिंग में चल रहे हैं। विभाग की ओर से शासन को 20 फायर स्टेशनों के नवनिर्माण के लिए वर्ल्ड बैंक से फंड की मांग की गई है, लेकिन अभी तक अग्निशमन विभाग को फंड नहीं मिल पाया है। विभाग के पास 28 होमटेंडर हैं। वाटर टैंक 70 उपलब्ध हैं, लेकिन 45 वाहन 15 साल से ज्यादा हो गए हैं। साथ ही पोर्टेबल पंप केयरिंग व्हीकल 22 हैं, लेकिन वो भी 15 साल की अवधि पूरी कर चुके हैं। फोम और पानी वाले फायर टैंकर की 98 गाड़ियां हैं इनमे से करीब 50 गाड़ियां ऐसी हैं, जो 18 साल से ऊपर यानी अपनी उम्र पार कर चुकी हैं। नियम के अनुसार 15 साल से पुराने वाहनों का आरटीओ की ओर से रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जा रहा है। बावजूद इसके फायर कर्मी सड़कों पर इन गाड़ियों को ले जाने के लिए मजबूर हैं।
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