चार दिनों तक चलने वाले आस्था के महापर्व छठ पूजा की आज से शुरुआत हो रही है। इस पर्व में भगवान सूर्य के साथ छठी माई की पूजा-उपासना विधि-विधान के साथ की जाती है। यह सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। छठ पूजा का पर्व हर साल कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। यह व्रत संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की कामना के लिए रखा जाता है। इसका पहला दिन नहाय-खाय होता है। इस साल नहाय खाय आज शुक्रवार 17 नवंबर को है। खरना छठ पूजा का दूसरा दिन होता है। इस बार खरना 18 नवंबर को पड़ रहा है। छठ पूजा में तीसरे दिन संध्या अर्घ्य होता है। इस दिन छठ पर्व की मुख्य पूजा की जाती है। इस दिन व्रती घाट पर आते हैं और डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। चौथा दिन यानी सप्तमी तिथि छठ महापर्व का अंतिम दिन होता है। इस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और व्रत का पारण होता है। इस साल 20 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। षष्टी तिथि की शुरुआत 18 नवंबर के दिन यानी शनिवार को सुबह 09 बजकर 18 मिनट से हो रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन 19 नवंबर यानी रविवार को सुबह 07 बजकर 23 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार छठ पूजा 19 नवंबर को है। यह सबसे कठिन व्रतों में से एक है। 36 घंटों तक कठिन नियमों का पालन करते हुए यह व्रत रखा जाता है। छठ पूजा का व्रत रखने वाले लोग 24 घंटे तक पानी भी ग्रहण नहीं करते हैं। यह पर्व चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक चलता है, लेकिन व्रत षष्टी या छठ को ही रखा जाता है।
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