उत्तराखंड में असामाजिक तत्वों के खिलाफ अब जागरूक होने लगे प्रदेश के नागरिक

 

देवभूमि उत्तराखंड में डेमोग्राफिक बदलाव को लेकर प्रदेश सरकार अपने स्तर से मंथन और चिंतन में जुटी है। वहीं डेमोग्राफिक परिवर्तन की वजह से पूरे उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में कानून व्यवस्था पर भी प्रश्न चिन्ह लगने लगे हैं। असामाजिक तत्व अब और अधिक सक्रिय हो गए हैं खास तौर पर दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को वह अपना टारगेट बना रहे हैं। पिछले दिनों लव जेहाद के तमाम मामले सामने आए और अब उन ग्रामीण क्षेत्रों को टारगेट किया जा रहा है जहां के लोग रोजगार के लिए सीजन के दौरान अपने गांव को छोड़कर दूसरी जगह जाते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में केवल महिलाएं रह जाती हैं जिन्हें आसानी से सामाजिक तत्व टारगेट करते हैं। उत्तराखंड में लगातार विशेष कर मुस्लिम समुदाय की वृद्धि होती हुई दिख रही है और पहाड़ से लेकर मैदान तक हो रही कई अप्रिय घटनाएं लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है। प्रदेश के रुद्रप्रयाग, चमोली और कई अन्य जिलों में स्थानीय लोग खुद ही अपनी संस्कृति को बचाने की कवायद में जुट गए हैं। रूद्रप्रयाग जिले में श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं वहां की सनातन धर्म संस्कृति को बरकरार रखने के लिए क्षेत्र की जनता ने आवाज बुलंद कर अपने क्षेत्र में जगह-जगह गैर हिन्दू धर्म , रोहिंग्या मुसलमानो के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है।

इसी तरह चमोली जिले में जहां भगवान विशाल विराजमान है वहां के लोगों ने भी इसी तरह से अपने धर्म संस्कृति की रक्षा के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया है। ये तस्वीरे आप देख सकते हैं कि किस तरह से अब उत्तराखंड के पहाड़ में रहने वाले सभी लोग आक्रोशित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हम सीजन में अपना गांव छोड़कर नीचे व्यापार के लिए आते हैं, लेकिन घर में रह रही महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। लगातार कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं जिसके बाद ये फैसला लिया गया है।

देवभूमि उत्तराखंड की स्थानीय जनता बार-बार यह सवाल उठा रही है कि डेमोग्राफिक बदलाव की वजह से उनको ही खामियां क्यों उठाना पड़ रहा है। उत्तराखंड राज्य गठन के लिए उन्होंने ही संघर्ष किया अपने राज्य की स्थापना के बाद अपने क्षेत्र के विकास की परिकल्पना के जो सपने देखे थे वह पूरे होने चाहिए जबकि आसामाजिक तत्व प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत पर हमला बोल रहे हैं, लव जेहाद, अपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वालों पर प्रशासन सख्त एक्शन कब लेगा यह भी एक बड़ा सवाल है। क्योंकि कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है और लोग अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

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