उत्तराखंड में कण-कण में देवी देवताओं का वास होता है। प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और अटूट आस्था भक्ति के अनेकों उदाहरण देखने को मिलते रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तरकाशी की सिलक्यारा टनल के मुहाने पर स्थापित बाबा बौखनाग का मंदिर है। मान्यता है कि बाबा बौखनाग पहाड़ों के रक्षक हैं। अटूट आस्था और श्रद्धा भक्ति के साथ उत्तरकाशी के भाटिया गांव से बाबा बौखनाग की डोली भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद के लिए अयोध्या रवाना हुई है। देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाबा की डोली का स्वागत किया और पूजा-अर्चना कर देश व प्रदेश की समृद्धि की कामना की। परेड ग्राउंड में स्वागत के बाद यात्रा को अयोध्या प्रस्थान के लिए मुख्यमंत्री धामी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ढोल नगाड़ों की थाप पर नृत्य भी किया और बाबा बौखनाग को प्रणाम करते हुए सिलक्यारा टनल के खौफनाक मंजर को भी याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिलक्यारा टनल में फंसे मजदूरों की जान बाबा बौखनाग की कृपा से बची। सीएम धामी ने कहा कि बाबा बौखनाग के स्मरण के बाद ही सिलक्यारा टनल में फंसे लोग कुशल बाहर निकल पाए। 17 दिनों तक 41 जिंदगियों के लिए पूरा देश प्रार्थना कर रहा था। इस अवसर पर बौखनाग मंदिर समिति ने मुख्यमंत्री धामी से बाबा बौखनाग मेले को राजकीय मेला घोषित करने की मांग की, जिसपर मुख्यमंत्री ने तत्काल फैसला लेते हुए कार्यक्रम में बाबा बौखनाग मेले को राजकीय मेला घोषित करने का ऐलान किया।
+ There are no comments
Add yours