उत्तराखंड में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। प्रदेश में इस साल अब तक 43 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं, जबकि 40 दवा निर्माण इकाइयों के लाइसेंस सस्पेंड किए जा चुके हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की रिपोर्ट में भी उत्तराखंड में बनी 24 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। इसके बाद एफडीए ने संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है और फेल बैच की दवाओं को बाजार से वापस मंगाने के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। प्रदेश में नकली दवाओं के कारोबार पर भी एजेंसियां लगातार शिकंजा कस रही हैं। हाल ही में एसटीएफ ने भगवानपुर और कोटद्वार में नकली दवाएं बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। वहीं एफडीए का कहना है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से दवाओं की बिक्री पर नजर रखी जा रही है और बिना लाइसेंस दवा भंडारण या बिक्री पाए जाने पर ड्रग्स एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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