पंचायतों के कार्यकाल को लेकर सियासत तेज, सरकार ने प्रशासकों को सौंपी जिम्मेदारी

 

 

उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। हालांकि इस बीच सरकार ने पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासकों की नियुक्ति कर दी है। इस मामले को लेकर अब प्रदेश में राजनीति तेज हो गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर नजर आ रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर कहा कि सरकार चुनाव कराने में अक्षम है। यही वजह है कि सरकार ने प्रशासकों को यह जिम्मेदारी सौंप दी है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। गणेश गोदियाल ने कहा कि सरकार को चाहिए था कि पंचायत जनप्रतिनिधियों की मांगों के अनुरूप जो कोविड काल में उन्हें दिक्कतें आई थीं, उसको देखते हुए नियम बनाकर उनका कार्य विस्तार किया जाता, लेकिन सरकार यह फैसला लेने में पूरी तरह विफल रही। वहीं बीजेपी में कांग्रेस पर पलटवार किया है। बीजेपी की प्रदेश प्रवक्ता सुनीता विद्यार्थी ने कहा है कि कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष खाली हो गए हैं और वह केवल लाइट में आना चाहते हैं इसलिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने सरकार के इस निर्णय को सकारात्मक पहल बताया है। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि प्रशासकों की जो नियुक्ति हुई है वह टेंपरेरी है।

 

 

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