उत्तराखंड के गैरसैंण के भराड़ीसैंण में बुधवार 21 अगस्त से शुरू हो रहे मानसून सत्र में विपक्ष पुष्कर सिंह धामी सरकार को भू-कानून, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था और सड़कों की बुरी हालत के साथ-साथ हाल में आई आपदा के मुद्दे पर घेरने के लिए पूरी तरीके से तैयार है। मानसून सत्र तीन दिवसीय अल्प अवधि के लिए गैरसैंण में आयोजित किया जा रहा है। उत्तराखंड की त्रासदी यह है कि उत्तराखंड को बने लगभग दो दशक निकल गए लेकिन आज तक उत्तराखंड को उसकी स्थाई राजधानी नहीं मिल सकी है। गैरसैंण के भराड़ीसैंण में कांग्रेस सरकार के समय में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यहां पहाड़ की विधानसभा तो स्थापित कर दी थी, लेकिन वह भी अंत तक गैरसैंण को राजधानी बनाने की घोषणा नहीं कर सके। हालांकि पहाड़ के विकास के ही लिए उत्तराखंड को उत्तर प्रदेश से अलग किया गया था। पहाड़ आज भी विकास के लिए तरस रहा है। अब देखना है कि इस मानसून सत्र में यह मुद्दा कितना जोर पकड़ता है। इस मुद्दे को लेकर कई बार राज्यव्यापी आंदोलन भी हो चुके हैं।
हालांकि राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन खो चुकी कांग्रेस पर मित्र विपक्ष के आरोप लगते रहे हैं। अब देखना है बुधवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र में वह एक मजबूत विपक्ष की कितनी भूमिका निभा पाएगी। हाल ही में कांग्रेस ने आपदा आने से पूर्व गढ़वाल के पहाड़ी क्षेत्रों में गांव-गांव और जिले जिले में जाकर न्याय संकल्प रैली और केदारनाथ प्रतिष्ठा रक्षा रैली निकालकर अपना विरोध व्यक्त किया था। अब देखना है कि बेरोजगारी, कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार और भू- कानून को लेकर कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के तेवर क्या रहेंगे। हालांकि सरकार इस तीन दिवसीय सत्र में अपने तरफ से पूरी तैयारी करके पहुंच रही है। संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल किस तरीके से फ्लोर मैनेज करेंगे इस पर सबकी नजर रहेगी और विपक्ष के सवालों का जवाब सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री क्या देंगे इसको लेकर जनता काफी उत्सुक है।
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