अफवाह के दौर में सोशल मीडिया की जिम्मेदारी

 

अब दौर सोशल मीडिया का है। खबर पल में लाखों तक पहुंचती है। जिम्मेदारी? वो भी उतनी ही बड़ी होनी चाहिए। एक क्लिक से सच फैलता है, एक शेयर से अफवाह भी। सच समाज को जोड़ता है, अफवाह तोड़ती है। आज हर हाथ में मोबाइल है, हर मोबाइल में सोशल मीडिया है। सूचनाएं तेज हुईं, दूरी घटी अच्छी बात है। मगर मुश्किल तब शुरू होती है जब बिना सोचे-समझे कुछ भी आगे बढ़ा दिया जाता है। एक अपुष्ट मैसेज, अधूरी वीडियो, भ्रामक तस्वीर, एडिटेड ऑडियो जो हजारों लोगों का मन बदल देती है। भीड़ बनती है, भ्रम फैलता है, और नुकसान किसका होता है? उसी आम आदमी का, छोटे दुकानदार का, रेहड़ी-पटरी वाले का, रोज कमाने-खाने वाले का। उसकी रोजी पर सीधी चोट पड़ती है।

इसलिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सावधानी पहली शर्त है। कोई भी पोस्ट, वीडियो या मैसेज साझा करने से पहले उसकी जांच जरूरी है। तीन सवाल खुद से पूछिए स्रोत क्या है? सूचना आधिकारिक है या नहीं? क्या मैं इसकी पुष्टि कर सकता हूं? अगर जवाब नही है, तो रुक जाइए। कमी या गड़बड़ी दिखे तो बताइए जरूर, लेकिन पहले तथ्यों को पक्का करिए। जल्दबाजी में सच और झूठ का फर्क मिट जाता है।

सूचनाओं की शुचिता बनाए रखना सबकी साझी जिम्मेदारी है। नीति बनाने वालों का दायित्व है कि वे स्पष्ट, समय पर और लगातार आधिकारिक जानकारी दें। चुप्पी अफवाह को जगह देती है। मीडिया की भूमिका है कि वह तथ्यों की पड़ताल करे और संतुलित खबर दें। टीआरपी के लिए सनसनी से बचे। सोशल मीडिया उपयोगकर्ता को यह समझना होगा कि बिना जांच के साझा की गई एक पोस्ट समाज में आग लगा सकती है। प्रशासनिक स्तर पर भी यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि कहीं से भी, किसी भी स्तर से अफवाह को बल न मिले। हर विभाग का सूचना तंत्र सक्रिय रहना चाहिए। रचनात्मक आलोचना और सुझाव लोकतंत्र की ताकत हैं। सुधार की जगह हमेशा रहती है। सवाल उठाइए, जवाब मांगिए। लेकिन झूठ फैलाकर, डर का माहौल बनाकर, किसी को बदनाम करके माहौल बिगाड़ना ठीक नहीं। इससे सिर्फ भ्रम फैलता है, आपसी भरोसा टूटता है और समाज कमजोर होता है। आम नागरिक से भी अपील है, सुनी-सुनाई बातों पर तुरंत यकीन मत करिए। वायरल है, इसलिए सच है यह सोच खतरनाक है। किसी भी सूचना को आगे बढ़ाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट, हेल्पलाइन या जिम्मेदार अधिकारी से पुष्टि कर लीजिए। डिजिटल दुनिया में विवेक ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। अपने परिवार, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को भी यह सिखाइए। सोशल मीडिया ताकत है, हथियार भी। इस ताकत से समाज को जोड़िए, तोड़िए मत। जिम्मेदारी से पोस्ट करिए, सतर्कता से शेयर करिए, समझदारी से कमेंट करिए। अफवाह का जहर नहीं, विश्वसनीयता का अमृत घोलिए। यही आज की सबसे बड़ी देशभक्ति है।

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