नारी शक्ति वंदन अधिनियम के खिलाफ विपक्ष का रवैया आधी आबादी के साथ अन्याय: सीएम धामी

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम के खिलाफ विपक्ष का रवैया आधी आबादी के साथ अन्याय: सीएम धामी

महिला अधिकारों की लड़ाई में बाधा को जीत बताना महिला विरोधी मानसिकता | महिला आरक्षण का विकल्परहित संकल्प, भाजपा करेगी साकार

 

*मुख्य बिंदु:*

 

*1. सीएम धामी का बयान*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के खिलाफ विपक्ष की वोटिंग को देश की आधी आबादी के खिलाफ अन्याय बताया। पार्टी मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास और मंशा हमेशा महिला विरोधी रही है। इंडी गठबंधन के साथ मिलकर संसद में जो किया, उसका जवाब जनता वोट के अधिकार से देगी।

 

*2. महिला अधिकारों पर रुख*

सीएम ने कहा कि महिला अधिकारों की लड़ाई में बाधा को जीत बताना विपक्ष की महिला विरोधी मानसिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिस तरह मातृ शक्ति के सामर्थ्य से यह दशक उत्तराखंड का बन रहा है, वैसे ही महिला अधिकार के इस विकल्परहित संकल्प को भाजपा साकार करेगी।

 

*3. संसद में विधेयक का जिक्र*

सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुसार, “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः” के भारतीय दर्शन को आत्मसात करते हुए संसद-विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़े तीन बिल प्रस्तुत किए गए थे। कांग्रेस और पूरा विपक्ष माताओं-बहनों के हक देने में बाधा बना। प्रधानमंत्री ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल मंत्र पर चलते हुए आधी आबादी को हक देने का प्रयास किया।

 

*4. 16-17 अप्रैल की चर्चा पर टिप्पणी*

सीएम ने कहा कि 16 और 17 अप्रैल को संसद में हुई चर्चा केवल विधेयकों तक सीमित नहीं थी, बल्कि देश की आधी आबादी को नीति-निर्माण में समान भागीदारी देने का महत्वपूर्ण अवसर था। यह माताओं, बहनों और बेटियों को सशक्त बनाने की दिशा में निर्णायक कदम हो सकता था। लेकिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने इसका विरोध किया।

 

*5. 131वें संशोधन विधेयक का उल्लेख*

सीएम ने कहा कि 18 अप्रैल को संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित न हो पाना विपक्ष की नकारात्मक राजनीति का परिणाम है। इस विधेयक का उद्देश्य महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ यथाशीघ्र सुनिश्चित करना था। विशेष रूप से इसे 2029 के आम चुनावों से लागू करने की दिशा में यह समयबद्ध पहल थी। विधेयक के माध्यम से जनगणना और परिसीमन के कारण होने वाली संभावित देरी को समाप्त करने का प्रयास किया गया।

 

*6. विपक्ष पर आरोप*

सीएम ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने तकनीकी आपत्तियों और प्रक्रियात्मक बहानों से प्रक्रिया को बाधित किया। परिसीमन को लेकर विपक्ष की आशंकाएं तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। परिसीमन एक संवैधानिक दायित्व है, जिसका उद्देश्य जनसंख्या के अनुरूप संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित व्यवस्था में सभी राज्यों के लिए समान अनुपात में सीटों की वृद्धि का प्रावधान था। इससे दक्षिण भारत समेत किसी राज्य के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

 

*7. धर्म आधारित आरक्षण पर बयान*

सीएम ने समाजवादी पार्टी द्वारा धर्म आधारित आरक्षण की मांग को असंवैधानिक और मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की मांगें तुष्टिकरण की राजनीति को दर्शाती हैं और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत हैं।

 

*8. कांग्रेस का रिकॉर्ड*

सीएम ने कहा कि महिला अधिकारों के मुद्दों पर कांग्रेस का रिकॉर्ड खराब रहा है। दशकों तक महिला आरक्षण विधेयक लंबित रखना, शाह बानो प्रकरण में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के विरुद्ध खड़ा होना और तीन तलाक समाप्त करने के प्रयासों का विरोध करना उसी मानसिकता को दर्शाता है।

 

*9. राष्ट्रीय निर्णयों का जिक्र*

सीएम ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने तीन तलाक उन्मूलन कानून, नागरिकता संशोधन अधिनियम, अनुच्छेद 370 से संबंधित निर्णय और जीएसटी जैसे आर्थिक सुधारों का भी विरोध किया। राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक निर्णयों पर भी इन दलों द्वारा बार-बार प्रश्न उठाए गए।

 

*10. पीएम और गृहमंत्री का संदर्भ*

सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं की भागीदारी राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य शर्त है। केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने भी स्पष्ट किया है कि परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा और दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा।

 

*11. उत्तराखंड का परिप्रेक्ष्य*

सीएम ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण सहित पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन में मातृ शक्ति का योगदान अतुलनीय है। अगर संविधान संशोधन विधेयक पारित हो जाता तो मातृ शक्ति को राजनीतिक रूप से सशक्त और नीति निर्माण में मजबूत भागीदारी सुनिश्चित होती। उनके संवैधानिक अधिकारों को टालना विधायी देरी नहीं, बल्कि सामाजिक प्रगति में बाधा है।

 

*12. समापन*

सीएम ने विश्वास दिलाया कि भाजपा महिलाओं के सशक्तिकरण और संतुलित प्रतिनिधित्व के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। यह विषय किसी एक दल का नहीं, बल्कि देश के भविष्य, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मजबूती से जुड़ा है।

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