देशभर में छठ महापर्व को धूमधाम के साथ मनाने की तैयारी शुरू हो गई है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बिहारी महासभा छठ महापर्व तैयारियों में जुट गई है। बिहारी महासभा ने छठ पर्व की तैयारी को लेकर बैठक की है। बैठक में छठ घाटों की सफाई व्यवस्था, ट्रैफिक व्यवस्था समेत कई बिंदुओं पर चर्चा की गई। आपको बताते चले कि संतान की कुशल कामना के लिए महिलाएं यह कठिन निर्जला व्रत रखती हैं। देहरादून में कई जगहों पर छठ महापर्व का आयोजन किया जाएगा, इसमें मालदेवता, टपकेश्वर, प्रेमनगर, चंद्रबनी जैसे कई स्थान शामिल हैं। बिहारी महासभा के अध्यक्ष लल्लन सिंह ने कहा कि 4 दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत दीपावली के 6 दिन के बाद से शुरू होती है। इसमें सूर्य देव और षष्ठी देवी की पूजा का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि बिहारी महासभा 20 सालों से छठ महापर्व का आयोजन कर रही है। उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से टपकेश्वर महादेव मंदिर, प्रेम नगर, चंद्रबनी, मालदेवता में मुख्य रूप से छठ पूजा का आयोजन बिहारी महासभा करेगी। बिहार महासभा ने सरकार से छठ पर्व पर अवकाश की मांग की है। रितेश कुमार कोषाध्यक्ष बिहारी महासभा ने बताया कि विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, और झारखंड जैसे राज्यों में इस पर्व की धूम देखने को मिलती है। भारत नहीं बल्कि छठ महापर्व की लोकप्रियता आज विदेशों तक देखने को मिलती है। छठ पूजा का व्रत कठिन व्रतों में से एक होता है। इसमें पूरे चार दिनों तक व्रत के नियमों का पालन करना पड़ता है और व्रती पूरे 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं। छठ पूजा में नहाय-खाय, खरना, अस्ताचलगामी अर्घ्य और उषा अर्घ्य का विशेष महत्व होता है। छठ पूजा को लेकर हुए बैठक में सैकड़ो की संख्या में बिहारी महासभा के सदस्यों ने भाग लिया जिसमें प्रमुख रूप से महासभा के अध्यक्ष ललन सिंह, कोषाध्यक्ष रितेश कुमार, सचिव चंदन कुमार झा, कार्यकारिणी सदस्य अमरेंद्र कुमार, आलोक सिंह,ओमकार त्रिपाठी, सुरेंद्र अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह आदि महत्वपूर्ण सदस्य मौजूद रहे।
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