केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी के स्लैब में बदलाव किए जाने को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर से केंद्र सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस ने कहा कि जीएसटी 1 को बिना तैयारी के साथ देशवासियों पर थोपा गया था। कांग्रेस का कहना है कि कांग्रेस नेताओं ने जनता की लड़ाई लड़ी, जिसके चलते आंशिक रूप से लोगों को राहत मिली है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और विधायक काजी निजामुद्दीन और प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने राजधानी देहरादून में संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की। काजी निजामुद्दीन ने कहा कि GST को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और मंत्री किसी ने आवाज नहीं उठाई कि उत्तराखंड को आर्थिक नुकसान हो रहा है। यहां तक की मुख्यमंत्री जीएसटी काउंसिल की बैठक में भी शामिल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि जीएसटी से राज्य की टैक्स ऑटोनोमी को पूरी तरह से खत्म कर दिया है और Gst से उत्तराखंड और हिमाचल जैसे राज्यों की आर्थिकी को नुकसान हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना तैयारी के जीएसटी 1 लाने से बहुत सारी फैक्ट्रियां बंद हुई है और बेरोजगारी बढ़ी है। अब गलत टैक्स की वजह से जो फैक्ट्रियां बंद हुई है उनको राहत दी जाए। वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि नोटबंदी और gst की वजह से लोगों की नौकरियां गई और आर्थिकी को हुआ बहुत बड़ा नुकसान हुआ। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से अपील की है कि सरकार ऐसा मैकेनिज्म तैयार करे जिससे जनता को सीधे लाभ मिले। करण महारानी कहा कि जीएसटी से उत्तराखंड को 1500 से 20000 करोड़ का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र के सामने पूरी तरह से खुद को सरेंडर किया है। उत्तराखंड में आपदा से काफी नुकसान हुआ है और हमें आमदनी बढ़ाने की जरूरत है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा अपील की है कि गैरसैंण में जीएसटी काउंसिल की बैठक आयोजित की जाए जिसमें सभी 9 हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए जिससे वह अपने राज्य को लेकर बात कर सकें।
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