मानसून से जुड़ी आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए प्रदेश के 66 स्थानों पर राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित किया गया। सभी 13 जिलों में यह अभ्यास हुआ और इनमें ज्यादातर स्थान पहली बार मॉक ड्रिल में शामिल किए गए। कई स्थानों पर आपदा जैसी स्थितियों को क्रिएट किया गया और उसके बाद वहां पर रिस्पांस टाइम को लेकर मॉक ड्रिल हुई। आपदा राहत और बचाव कार्यों को लेकर प्रशासनिक अमला कितना तैयार है और आपदा कंट्रोल रूम से किस तरह से समन्वय बनाकर सभी विभाग कम कर रहे हैं इसको जांचा और परखा गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद मॉक ड्रिल का निरीक्षण किया। राज्य आपदा परिचालन केंद्र में मुख्यमंत्री धामी पहुंचे और वहां से उन्होंने मॉक ड्रिल की मॉनिटरिंग की इस दौरान प्रदेश के आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक, राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला, आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन सहित तमाम अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। इस मॉक ड्रिल का मकसद विभागों के बीच समन्वय मजबूत करना और राहत-बचाव की तैयारियों को परखना था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लिया और सभी अधिकारियों को 24 घंटे, सातों दिन अलर्ट रहने के सख्त निर्देश दिए। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र यानी कंट्रोल रूम से पूरे प्रदेश में मौसम और संवेदनशील इलाकों की पल-पल निगरानी की जा रही है। सीएम ने साफ कहा है कि आपदा के वक्त राहत-बचाव में एक मिनट की भी देरी बर्दाश्त नहीं होगी। सभी विभाग मिलकर काम करेंगे।
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