*आज सुबह मां के साथ अपने पैतृक क्षेत्र, कनालीछीना के टुंडी–बारमौं पहुंचना मेरे लिए बेहद भावुक क्षण था। यह वही धरा है जहां मैंने बचपन बिताया, पहली बार विद्यालय की राह पकड़ी और जहां गांव के स्नेह, संस्कृति और परम्पराओं की समृद्ध छाया ने मेरे व्यक्तित्व को आकार दिया।*
*गांव पहुंचते ही बुजुर्गों का स्नेहिल आशीर्वाद और मातृशक्ति का अथाह प्रेम मन को भावनाओं से भर गया। कई बुजुर्ग आज भी मुझे बचपन के नाम से पुकारते हैं, यह अपनत्व शब्दों में समाना मुश्किल है। नौनिहालों और युवाओं की मुस्कुराहटों में वह सारी स्मृतियां फिर जीवंत हो उठीं, जिन्होंने मुझे मूल्य सिखाए और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।*
*हर चेहरा अपना लगा, हर आंगन स्मृतियों से भरा और हर कदम बचपन की गलियों से होकर गुजरता हुआ महसूस हुआ। टुंडी–बारमौं मेरे लिए सिर्फ एक गांव नहीं बल्कि मेरी जड़ें, संस्कार और मेरी पहचान है।*
*आप सभी का स्नेह मेरे लिए शक्ति, प्रेरणा और जिम्मेदारी है। आज का दिन हमेशा हृदय में अंकित रहेगा। आपका प्रेम और विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है, जो हर कदम पर मेरा मार्गदर्शन करता रहेगा।*
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