प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोकल फॉर लोकल, लोकल टू ग्लोबल और आत्मनिर्भर भारत का मंत्र दिया है। इसी सोच को धरातल पर उतारने के लिए उत्तराखंड सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड का उत्पाद खरीदने वाले को उसमें पहाड़ की मेहनत, संस्कृति, परंपरा और मिट्टी की खुशबू भी महसूस हो। ग्रामीण हाट, विपणन केंद्र, कलेक्शन सेंटर और एग्री सर्विस सेंटर जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। मकसद है कि किसानों, महिलाओं और छोटे उद्यमियों को उनके उत्पाद का बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देकर पलायन रोकने की दिशा में भी काम कर रही है। ग्राम्य विकास, लघु एवं सूक्ष्म-मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग और भाषा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे कैबिनेट मंत्री भारत चौधरी के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ स्वरोजगार और छोटे उद्यमों को मजबूत किया जा रहा है। खासतौर पर महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर है। प्रदेश में अब तक तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। राज्य सरकार की योजनाओं का असर ग्रामीण स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। बड़ी सँख्या में राज्य से पलायन कर चुके लोगों ने रिवर्स पलायन कर खुद का स्वरोजगार शुरू किया है। राज्य में मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के माध्यम से अब तक 13 हजार से अधिक उद्यमियों को सहयोग दिया गया है। वहीं, आठ हजार से अधिक महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को उद्यमिता और आजीविका के अवसरों से जोड़ा गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में पांच लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं 70 हजार से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। पहाड़ी मसालों, मंडुवा, झंगोरा, दालों, शहद, अचार, जैम, हस्तशिल्प और ऊनी उत्पादों को महिलाएं कारोबार का रूप दे रही हैं।स्थानीय उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने हाउस ऑफ हिमालयाज नाम से अंब्रेला ब्रांड तैयार किया है। इसके जरिए उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को एक पहचान देने और उन्हें राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाकर स्थानीय लोगों को गांव में ही आत्मनिर्भर बनाने की कोशिशों से सरकार को उम्मीद है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होने के साथ पलायन पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
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