विरासत कला उत्सव के चौथे दिन शास्त्रीय नृत्य की भव्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जैसे कि देहरादून के सांस्कृतिक आकाश में एक नया सूरज उग आया हो। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय एवं लेखक गाँव, थानों, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. कविता खुराना के निर्देशन में उनके दल द्वारा शास्त्रीय नृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई, जबकि रमिंदर खुराना ने ओडिशी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया, जैसे कि उनकी नृत्य की हर मुद्रा में एक अलग ही कहानी बयां हो रही हो।
शास्त्रीय नृत्य की शुरुआत “शिव मंगलाचरण – गंगा तरंग” से हुई, जो ओडिशी नृत्य की पारंपरिक मंगलाचरण रचना है, जिसने दर्शकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाकर खड़ा कर दिया। इसके पश्चात कलाकारों ने “वंदे मातरम्” पर आधारित एक विशेष फ्यूज़न प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों के दिलों में देशभक्ति की भावना को और भी प्रबल कर दिया। कार्यक्रम के अंत में उपनिदेशक (कार्यक्रम) मुकेश उपाध्याय द्वारा सभी मुख्य अतिथियों एवं कलाकारों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जो इस कार्यक्रम की भव्यता को और भी बढ़ा गय।
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